Hindi Class 12 Half Yearly Exam Answer Key 2025
खण्ड – अ वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न संख्या 1 से 80 तक के प्रत्येक वस्तुनिष्ठ प्रश्न के साथ चार विकल्प दिए गए हैं, जिनमें से कोई एक सही है। इन 80 प्रश्नों में से किन्हीं 50 प्रश्नों के उत्तर अपने द्वारा चुने गए सही विकल्प को ओएमआर उत्तर पत्रक पर चिह्नित करें।1) एक ध्वनि जब दो व्यंजनों से संयुक्त हो जाए, तब वह क्या कहलाती है?
(A) युग्मक ध्वनि
(B) संपृक्त ध्वनि
(C) संयुक्त ध्वनि
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans – (B) संपृक्त ध्वनि
2) उच्चारण में वायुप्रक्षेप की दृष्टि से व्यंजन के कितने भेद होते हैं?
(A) तीन
(B) चार
(C) एक
(D) दो
Ans – (D) दो
3) निम्न में कौन शुद्ध शब्द है?
(A) रसायण
(B) महात्म्य
(C) बनोवास
(D) शदृश
Ans – (B) महात्म्य
4) निम्न में कौन अशुद्ध शब्द है?
(A) प्रेयशी
(B) शताब्दी
(C) सौजन्य
(D) वैमनस्य
Ans – (A) प्रेयशी
5) निम्न में कौन इकहरा उद्धरणचिह्न है?
(A) ” ”
(B) ,
(C) ;
(D) ‘…’
Ans – (D) ‘…’
6) ‘प्रशांत महासागर’ किस संज्ञा का उदाहरण है?
(A) व्यक्तिवाचक
(B) भाववाचक
(C) समूहवाचक
(D) जातिवाचक
Ans – (A) व्यक्तिवाचक
7) ‘कठोरता’ किस संज्ञा का उदाहरण है?
(A) जातिवाचक
(B) समूहवाचक
(C) भाववाचक
(D) व्यक्तिवाचक
Ans – (C) भाववाचक
8) ‘मकान’ किस संज्ञा का उदाहरण है?
(A) जातिवाचक
(B) समूहवाचक
(C) द्रव्यवाचक
(D) व्यक्तिवाचक
Ans – (A) जातिवाचक
9) हिन्दी में कितने लिंग होते हैं?
(A) चार
(B) पाँच
(C) एक
(D) दो
Ans – (D) दो
10) ‘लिंग’ किस भाषा का शब्द है?
(A) अरबी
(B) फारसी
(C) संस्कृत
(D) उर्दू
Ans – (C) संस्कृत
11) निम्न में कौन स्त्रीलिंग शब्द है?
(A) लालिमा
(B) नख
(C) न्याय
(D) संकल्प
Ans – (A) लालिमा
12) निम्न में कौन पुंलिंग शब्द है?
(A) रीति
(B) सेवा
(C) अनुमति
(D) पृष्ठ
Ans – (D) पृष्ठ
13) निम्न में कौन अल्पप्राण व्यंजन है?
(A) ख
(B) झ
(C) ज
(D) थ
Ans – (C) ज
14) निम्न में कौन व्यंजन अघोष है?
(A) छ
(B) ग
(C) ज
(D) ड
Ans – (A) छ
15) ‘औ’ का उच्चारण होता है
(A) कंठ और तालु से
(B) दाँत और जीभ से
(C) कंठ और ओष्ठ से
(D) दाँत और ओष्ठ से
Ans – (C) कंठ और ओष्ठ से
16) ‘ठ’ का उच्चारण-स्थान है
(A) दंत
(B) मूर्द्धा
(C) ओष्ठ
(D) तालु
Ans – (B) मूर्द्धा
17) जिस स्वर के उच्चारण में तिगुना समय लगे, उसे क्या कहते हैं?
(A) हस्व
(B) लघु
(C) प्लुत
(D) दीर्घ
Ans – (C) प्लुत
18) छंदशास्त्र में दीर्घ मात्रा को क्या कहते हैं?
(A) हस्व
(B) लघु
(C) गुरु
(D) प्लुत
Ans – (C) गुरु
19) निम्न में कौन स्पर्श व्यंजन नहीं है?
(A) प
(B) त
(C) ध
(D) र
Ans – (D) र
20) निम्न में कौन ऊष्म व्यंजन नहीं है?
(A) श
(B) ह
(C) झ
(D) ष
Ans – (C) झ
21) निम्न में कौन अन्तःस्थ व्यंजन है?
(A) म
(B) व
(C) न
(D) द
Ans – (B) व
22) ‘श-ष-स’ कौन व्यंजन हैं?
(A) स्पर्श व्यंजन
(B) संघर्षी व्यंजन
(C) अन्तःस्थ व्यंजन
(D) संयुक्त व्यंजन
Ans – (B) संघर्षी व्यंजन
23) सुरों के आरोह-अवरोह क्रम को किसकी संज्ञा दी गई है?
(A) संगम
(B) सुरलहर
(C) बलाघात
(D) समास
Ans – (B) सुरलहर
24) निम्न में कौन गुण स्वरसंधि का उदाहरण है?
(A) महीन्द्र
(B) शिवालय
(C) भानूदय
(D) महर्षि
Ans – (D) महर्षि
25) निम्न में कौन वृद्धि स्वरसंधि का उदाहरण है?
(A) सदैव
(B) मध्वालय
(C) पावन
(D) यद्यपि
Ans – (A) सदैव
26) ‘उल्लास’ का संधि-विच्छेद है
(A) उत् + लास
(B) उत् + नति
(C) उल् + लास
(D) उत् + लाश
Ans – (A) उत् + लास
27) ‘दुरात्मा’ का संधि-विच्छेद है
(A) दुराः + आत्मा
(B) दुस् + आत्मा
(C) दुः + आत्मा
(D) दुः + कात्मा
Ans – (C) दुः + आत्मा
28) हिन्दी भाषा किस लिपि में लिखी जाती है?
(A) मराठी
(B) शारदा
(C) कुटिल
(D) देवनागरी
Ans – (D) देवनागरी
29) किस लिपि को संसार की अन्य लिपियों की तुलना में अधिक वैज्ञानिक माना गया है?
(A) रोमन को
(B) खरोष्ठी को
(C) फारसी को
(D) देवनागरी को
Ans – (D) देवनागरी को
30) ‘आदत’ का बहुवचन रूप है
(A) आदतें
(B) आदतै
(C) आदतौ
(D) अदते
Ans – (A) आदतें
31) संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उनका (संज्ञा या सर्वनाम का) क्रिया से संबंध सूचित हो, उसे (उस रूप को) क्या कहते हैं?
(A) कारक
(B) वचन
(C) क्रिया
(D) लिंग
Ans – (A) कारक
32) ‘रौशन घर से बाहर आया’ यह किस कारक का उदाहरण है?
(A) कर्म
(B) करण
(C) अपादान
(D) सम्बंध
Ans – (C) अपादान
33) ‘सड़क पर भीड़ है’ यह किस कारक का उदाहरण है?
(A) संप्रदान
(B) सम्बंध
(C) संबोधन
(D) अधिकरण
Ans – (D) अधिकरण
34) ‘दरवाजे पर कोई खड़ा है’ यह किस सर्वनाम का उदाहरण है?
(A) निजवाचक
(B) निश्चयवाचक
(C) अनिश्चयवाचक
(D) संबंधवाचक
Ans – (C) अनिश्चयवाचक
35) ‘तुम क्या पढ़ रहे हो?’ – यह किस सर्वनाम का उदाहरण है?
(A) प्रश्नवाचक
(B) निजवाचक
(C) निश्चयवाचक
(D) संबंधवाचक
Ans – (A) प्रश्नवाचक
36) ‘मैं आप चला जाऊँगा’ यह किस सर्वनाम का उदाहरण है?
(A) प्रश्नवाचक
(B) निजवाचक
(C) सम्बंधवाचक
(D) निश्चयवाचक
Ans – (B) निजवाचक
37) ‘वह अमेरिकी लड़की है’ यह किस विशेषण का उदाहरण है?
(A) सार्वनामिक
(B) संख्यावाचक
(C) गुणवाचक
(D) प्रविशेषण
Ans – (C) गुणवाचक
38) ‘सब दूध गिर गया’ यह किस विशेषण का उदाहरण है?
(A) निश्चित संख्यावाचक
(B) अनिश्चित संख्यावाचक
(C) निश्चित परिमाणबोधक
(D) अनिश्चित परिमाणबोधक
Ans – (D) अनिश्चित परिमाणबोधक
39) ‘गोपाल पढ़ने में बहुत तेज है’ यह किसका उदाहरण है?
(A) प्रविशेषण का
(B) तुलनात्मक का
(C) सार्वनामिक का
(D) संख्यावाचक का
Ans – (A) प्रविशेषण का
40) ‘प्रमिला रो रही है’ – यह किस क्रिया का उदाहरण है?
(A) सकर्मक
(B) अकर्मक
(C) नामधातु
(D) प्रेरणार्थक
Ans – (B) अकर्मक
41) ‘महेश पढ़ कर खेलने गया’ – यह किस क्रिया का उदाहरण है?
(A) पूर्वकालिक
(B) प्रेरणार्थक
(C) नामधातु
(D) समाप्तिबोधक
Ans – (A) पूर्वकालिक
42) ‘बारिश होती तो खेती अच्छी होती’ – किस काल का उदाहरण है?
(A) संभाव्य भविष्य का
(B) हेतुहेतुमद् भविष्य का
(C) सामान्य भविष्य का
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans – (D) इनमें से कोई नहीं
43) ऐसे शब्द को क्या कहते हैं, जिसके रूप में लिंग, वचन, पुरुष, कारक इत्यादि के कारण कोई विकार उत्पन्न नहीं होता?
(A) लिंग
(B) शब्द
(C) कारक
(D) अव्यय
Ans – (D) अव्यय
44) निम्न में कौन क्रियाविशेषण का उदाहरण है?
(A) राधा धीरे-धीरे गाती है।
(B) राधिका हँसती है।
(C) वह सो गया।
(D) मैं टहल रहा हूँ।
Ans – (A) राधा धीरे-धीरे गाती है।
45) निम्न में कौन तत्सम शब्द है?
(A) भक्त
(B) बच्चा
(C) बालक
(D) चौथा
Ans – (A) भक्त
46) निम्न में कौन तद्भव शब्द है?
(A) पिया
(B) मयूर
(C) पुष्य
(D) नख
Ans – (A) पिया
47) निम्न में कौन विदेशी शब्द है?
(A) सूचि
(B) सन्द्
(C) तोता
(D) दुकान
Ans – (D) दुकान
48) निम्न में कौन देशज शब्द है?
(A) मीठा
(B) खीर
(C) लोटा
(D) हल्दी
Ans – (C) लोटा
49) निम्न में कौन योगरूढ़ शब्द का उदाहरण है?
(A) ईश्वर
(B) पुस्तक
(C) चक्रपाणि
(D) मद
Ans – (C) चक्रपाणि
50) ‘परिश्रम’ शब्द में उपसर्ग है
(A) अ
(B) स्य
(C) परिच
(D) परि
Ans – (D) परि
51) ‘सुदूर’ शब्द में उपसर्ग है
(A) दू
(B) सु
(C) सुद्
(D) सम्
Ans – (B) सु
52) ‘श्रवणीय’ शब्द में प्रत्यय है
(A) श्रवण
(B) नीय
(C) य
(D) अनीय
Ans – (D) अनीय
53) ‘चंडूखाने की गप’ – मुहावरे का अर्थ है
(A) जवाब न देना
(B) व्यर्थ निंदा
(C) बहकी या बेतुकी बातें करना
(D) आय से अधिक व्यय करना
Ans – (C) बहकी या बेतुकी बातें करना
54) ‘शयन का आगार’ – वाक्यांश के लिए एक शब्द है
(A) सम्मेलन
(B) सुखद
(C) शयनागार
(D) समीक्षक
Ans – (C) शयनागार
55) ‘निरामिष’ का विलोम शब्द है
(A) ग्रामीण
(B) सामिष
(C) मलिन
(D) संलग्न
Ans – (B) सामिष
56) ‘सकर्म’ का विलोम शब्द है
(A) कुपथ
(B) निश्शंक
(C) स्थूल
(D) निष्कर्म
Ans – (D) निष्कर्म
57) ‘मछली’ का पर्यायवाची शब्द है
(A) तुंग
(B) इला
(C) झख
(D) उर्वी
Ans – (C) झख
58) निम्न में कौन ‘चोर’ का पर्यायवाची शब्द नहीं है?
(A) दस्यु
(B) अर्णव
(C) तस्कर
(D) कुंभिल
Ans – (B) अर्णव
59) निम्न में कौन शुद्ध वाक्य है?
(A) काला लड़की पढ़ रही है।
(B) वह कुशाग्र बुद्धि है।
(C) मुझे ठंडी दूध पसंद है।
(D) उसका पत्नी का नाम रमा है।
Ans – (B) वह कुशाग्र बुद्धि है।
60) ‘कामायनी’ की नायिका कौन है?
(A) सृष्टि
(B) मधुरा
(C) श्रुति
(D) श्रद्धा
Ans – (D) श्रद्धा
61) जयशंकर प्रसाद की कौन रचना अधूरी है?
(A) कंकाल
(B) तितली
(C) छाया
(D) इरावती
Ans – (D) इरावती
62) कवि भूषण के अनुसार मुंडों की माला देकर रुद्र को रिझाने का कार्य कौन कर रहा है?
(A) छत्रसाल की करवाल
(B) छत्रपति के सेनापति
(C) भूषण स्वयं
(D) शिवाजी महाराज
Ans – (A) छत्रसाल की करवाल
63) नाभादास के ‘छप्पय’ के अनुसार मुँह देख कर बात नहीं करता?
(A) सूरदास
(B) कबीरदास
(C) तुलसीदास
(D) कृष्णदास
Ans – (B) कबीरदास
64) तुलसीदास ने पठित पाठ में ‘श्रीराम’ के लिए किस शब्द का प्रयोग किया है?
(A) कोसलराजु
(B) गरीबनिवाजु
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans – (C) (A) और (B) दोनों
65) सूरदास के अनुसार निम्न में कौन-सा आनंद तीनों लोक में नहीं है?
(A) जो आनंद वासुदेव-देवकी ले रहे हैं।
(B) जो आनंद नंद-यशोदा ले रहे हैं।
(C) जो आनंद गोपी-राधा ले रहे हैं।
(D) जो आनंद वासुदेव-रोहिणी ले रहे हैं।
Ans – (B) जो आनंद नंद-यशोदा ले रहे हैं।
66) भूषण के पिता का नाम क्या था?
(A) मतिराम
(B) चिंतामणि त्रिपाठी
(C) रत्नाकर त्रिपाठी
(D) घतिराम त्रिपाठी
Ans – (C) रत्नाकर त्रिपाठी
67) नाभादास कैसे भक्त थे?
(A) सगुणोपासक रामभक्त
(B) निर्गुणोपासक
(C) सगुणोपासक शिवभक्त
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans – (A) सगुणोपासक रामभक्त
68) तुलसी ने अपने प्रथम पद में ‘जगजननि’ कह कर किसे संबोधित किया है?
(A) दुर्गा माता को
(B) पार्वती माता को
(C) जानकी माता को
(D) शारदा माता को
Ans – (C) जानकी माता को
69) सूरदास रचित पद में नंद के गोद में कौन खा रहा है?
(A) कृष्ण
(B) बलराम
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans – (A) कृष्ण
70) कवि जायसी के अनुसार फूल के नष्ट होने पर भी खुशबू रह जाती है, ठीक उसी प्रकार जगत में जायसी के न रहने पर भी क्या रहेगा?
(A) कलंकरूपी अपयश
(B) कुरुपता की गाथा
(C) सुगंधरूपी कीर्ति
(D) अहंकाररूपी गाथा
Ans – (C) सुगंधरूपी कीर्ति
71) ‘तुमुल कोलाहल कलह में’ शीर्षक पाठ के रचनाकार हैं
(A) जयशंकर प्रसाद
(B) शमशेर बहादुर सिंह
(C) रघुवीर सहाय
(D) ज्ञानेन्द्रपति
Ans – (A) जयशंकर प्रसाद
72) ‘कड़बक’ शीर्षक पाठ के रचनाकार हैं
(A) नाभादास
(B) तुलसीदास
(C) सूरदास
(D) मलिक मुहम्मद जायसी
Ans – (D) मलिक मुहम्मद जायसी
73) ‘ओ सदानीरा’ शीर्षक पाठ के अनुसार किनकी लोकगाथाओं में दो सौ वर्ष पूर्व के महाप्रस्थान की कथा बिखरी पड़ी है?
(A) धाँगड़ों की
(B) हरिदेव सिंह की
(C) राजाओं की
(D) अंग्रेजों की
Ans – (A) धाँगड़ों की
74) “मैं व्यक्तिगत प्रेम को विशेष रूप से गांवानेवाला था, परन्तु अब इस भावना का मेरे हृदय एवं मस्तिष्क में कोई विशेष स्थान नहीं रहा।” – यह कथन है
(A) सुखदेव का
(B) भगत सिंह का
(C) किशन सिंह का
(D) प्रोफेसर साहब का
Ans – (B) भगत सिंह का
75) अमोल्वा गाँव में किसकी तूती बोलती थी?
(A) श्री बबनजी गोखले की
(B) एन साहब की
(C) देवदास गांधी की
(D) पुंडलिक जी की
Ans – (B) एन साहब की
76) दो अशोक स्तंभ कहाँ पर ध्वस्त पड़े हैं जिनमें से एक पर सिंह था और दूसरे पर बैल?
(A) भितिहरवा
(B) रामपुरवा
(C) बड़हरवा
(D) मधुबन
Ans – (B) रामपुरवा
77) भगत सिंह और सुखदेव का आपस में कैसा रिश्ता था?
(A) भाई का
(B) मित्रता का
(C) शत्रुता का
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans – (A) भाई का
78) ‘ओ सदानीरा’ शीर्षक पाठ की विधा है
(A) एकांकी
(B) कहानी
(C) निबंध
(D) जीवनी
Ans – (C) निबंध
79) ‘बातचीत’ शीर्षक पाठ के रचनाकार हैं
(A) बालकृष्ण भट्ट
(B) चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’
(C) मोहन राकेश
(D) नामवर सिंह
Ans – (A) बालकृष्ण भट्ट
80) ‘अछूत समस्या’ किसकी कृति है?
(A) भगत सिंह की
(B) सुखदेव की
(C) उदय प्रकाश की
(D) जयप्रकाश नारायण की
Ans – (A) भगत सिंह की
खण्ड – ब
विषयनिष्ठ प्रश्न
- निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखें:
(i) दीपावली
मनुष्य दीपावली हमारे देश का सबसे बड़ा और पावन त्यौहार है। इसे “दीपों का पर्व” भी कहा जाता है। दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाया था। तभी से यह पर्व हर वर्ष बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
दीपावली से पहले लोग अपने घरों की सफ़ाई करते हैं और उन्हें दीपों, मोमबत्तियों तथा रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं। इस दिन लोग माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। लक्ष्मी जी को धन की देवी माना जाता है, इसलिए व्यापारी वर्ग इस दिन अपने नए खातों की शुरुआत करता है। बच्चे और बड़े पटाखे जलाकर खुशियाँ मनाते हैं तथा एक-दूसरे को मिठाइयाँ बाँटते हैं।दीपावली केवल बाहरी प्रकाश का पर्व नहीं है, यह हमें आंतरिक अंधकार को मिटाने का भी संदेश देती है। यह त्यौहार हमें सिखाता है कि बुराई का अंत निश्चित है और अच्छाई सदैव विजयी होती है। हमें इस दिन नशा, जुआ और फिजूलखर्ची जैसी बुराइयों से बचना चाहिए। दीपावली का वास्तविक महत्व तभी है जब हम अपने जीवन में ईमानदारी, सत्य और प्रेम का दीप जलाएँ।
(ii) पुस्तकालय
पुस्तकालय ज्ञान का अमूल्य भंडार होता है। यह वह स्थान है जहाँ विविध विषयों की हजारों पुस्तकें सुरक्षित रखी जाती हैं। पुस्तकालय का महत्व विद्यार्थी, शिक्षक, शोधकर्ता और सामान्य पाठक सभी के लिए है। यहाँ हमें शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, इतिहास, राजनीति, धर्म और संस्कृति से संबंधित पुस्तकें पढ़ने को मिलती हैं।
पुस्तकालय में अनुशासन और शांति का विशेष महत्व होता है ताकि पाठक ध्यानपूर्वक अध्ययन कर सकें। पुस्तकालय हमें नई-नई जानकारियाँ देता है और हमारी सोच को विकसित करता है। किताबें हमारे जीवन की सच्ची मित्र कही जाती हैं। वे हमें ज्ञान, प्रेरणा और जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करती हैं। एक अच्छी पुस्तक जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन करती है।
विद्यालय और महाविद्यालय में पुस्तकालय का विशेष महत्व होता है। छात्र-छात्राएँ यहाँ आकर परीक्षा की तैयारी करते हैं और अतिरिक्त ज्ञान प्राप्त करते हैं। आज के समय में डिजिटल पुस्तकालय का भी महत्व बढ़ गया है जहाँ ई-पुस्तकें उपलब्ध रहती हैं।
सच कहा गया है— “पुस्तकें मानव की सबसे अच्छी मित्र होती हैं।” इसलिए हमें पुस्तकालय की आदत डालनी चाहिए। नियमित रूप से पुस्तकालय जाकर हम ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं और समाज में शिक्षित नागरिक बन सकते हैं।
(iii) पहला सुख निरोगी काया
हमारे जीवन में सबसे बड़ा धन स्वास्थ्य है। यदि शरीर स्वस्थ है तो हम जीवन की हर खुशी का आनंद ले सकते हैं। बीमार व्यक्ति चाहे कितना ही धनी क्यों न हो, उसका जीवन दुख और पीड़ा से भरा रहता है। इसी कारण कहा गया है— “पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख घर में माया।”
निरोगी काया से व्यक्ति हर काम आसानी से कर सकता है। विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छा कर सकते हैं, किसान खेती में मेहनत कर सकते हैं और व्यापारी व्यापार में सफलता पा सकते हैं। परंतु यदि शरीर अस्वस्थ हो तो कुछ भी करना कठिन हो जाता है। इसलिए स्वास्थ्य का महत्व सबसे अधिक है।
स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए हमें नियमित व्यायाम करना चाहिए, सुबह सैर पर जाना चाहिए और शुद्ध व संतुलित आहार लेना चाहिए। समय पर भोजन और नींद भी जरूरी है। नशा, जुआ और आलस्य जैसी बुरी आदतों से दूर रहना चाहिए। स्वच्छता पर ध्यान देना भी उतना ही आवश्यक है क्योंकि गंदगी से बीमारियाँ फैलती हैं।
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क रहता है। जब शरीर और मन दोनों स्वस्थ हों, तभी हम परिवार, समाज और राष्ट्र की सेवा कर सकते हैं। इसलिए हमें जीवन में स्वास्थ्य को सबसे ऊपर रखना चाहिए और निरोगी काया को बनाए रखने के लिए अच्छे आदर्श अपनाने चाहिए।
(iv) मेरे प्रिय कवि
मेरे प्रिय कवि सूरदास जी हैं। वे भक्तिकाल के महान कवि थे और उन्हें “अष्टछाप कवियों” में गिना जाता है। सूरदास जी का जीवन बहुत साधारण था, पर उनकी कविताओं में असाधारण भक्ति और भावनाएँ दिखाई देती हैं। वे जन्म से नेत्रहीन थे, लेकिन उनकी कल्पना शक्ति बहुत अद्भुत थी।
सूरदास जी ने अपनी रचनाओं में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोपियों के साथ उनके प्रेम का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया है। उनके पदों को पढ़कर ऐसा लगता है मानो श्रीकृष्ण हमारे सामने ही खेल रहे हों। उनकी भाषा सरल, मधुर और भावपूर्ण है।
उनकी प्रमुख रचना “सूरसागर” है। इसके अलावा “साहित्यलहरी” और “सूरसरावली” भी प्रसिद्ध हैं। उनकी कविताओं में भक्ति, प्रेम और वात्सल्य का अनोखा समन्वय मिलता है। सूरदास जी ने भक्तिकाव्य को नई ऊँचाई दी और हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाया।
मुझे सूरदास जी इसलिए प्रिय हैं क्योंकि उनकी कविताएँ न केवल हृदय को छूती हैं बल्कि हमें भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति की ओर भी प्रेरित करती हैं। उनके पदों में भावुकता के साथ-साथ अध्यात्म का संदेश छिपा होता है। यही कारण है कि सूरदास जी मेरे प्रिय कवि हैं।
(v) वसुधैव कुटुंबकम्
“वसुधैव कुटुंबकम्” संस्कृत का एक अत्यंत सुंदर और महान विचार है। इसका अर्थ है— “यह पूरी धरती एक परिवार है।” यह वाक्य हमें भारतीय संस्कृति और परंपरा की महानता का बोध कराता है।
इस विचार का तात्पर्य यह है कि संसार के सभी मनुष्य आपस में भाई-बहन हैं। किसी से घृणा, ईर्ष्या या भेदभाव नहीं करना चाहिए। जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर बाँटना गलत है। यदि हम सभी को एक परिवार मानें तो समाज में शांति, प्रेम और भाईचारा बढ़ेगा।
आज के समय में जब युद्ध, आतंकवाद और हिंसा जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं, तब “वसुधैव कुटुंबकम्” का महत्व और भी अधिक हो गया है। यह विचार हमें सिखाता है कि सभी देशों को आपसी मतभेद छोड़कर सहयोग करना चाहिए। केवल इसी मार्ग से विश्व में शांति स्थापित हो सकती है।
यह महान संदेश हमारे प्राचीन ग्रंथों में दिया गया है। हमारे ऋषि-मुनि पूरे विश्व को एक परिवार मानते थे। वे सभी के कल्याण की प्रार्थना करते थे। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में सहिष्णुता, उदारता और विश्वबंधुत्व का भाव गहराई से दिखाई देता है।
(vi) समाजसेवा
समाजसेवा का अर्थ है— दूसरों की भलाई करना और निस्वार्थ भाव से सेवा करना। यह मनुष्य का सबसे बड़ा कर्तव्य है। जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तब हमें सच्चा सुख और संतोष मिलता है।
समाजसेवा कई रूपों में की जा सकती है। गरीबों को भोजन और वस्त्र देना, बीमारों की सेवा करना, शिक्षा का प्रसार करना, स्वच्छता अभियान में सहयोग करना और जरूरतमंदों की सहायता करना— ये सभी समाजसेवा के कार्य हैं। यह केवल अमीर या बड़े लोगों का काम नहीं है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार समाजसेवा कर सकता है। महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और विनोबा भावे जैसे महापुरुषों ने समाजसेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। उन्होंने सिखाया कि सेवा करना ही सच्ची पूजा है।
आज के समय में समाजसेवा का महत्व और भी बढ़ गया है। गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए हर नागरिक को आगे आना चाहिए। यदि हम सब मिलकर समाज की भलाई के लिए काम करें तो हमारा देश प्रगति करेगा। समाजसेवा से न केवल दूसरों को लाभ होता है बल्कि हमारे अंदर भी दया, करुणा और सहानुभूति की भावना विकसित होती है। यही भावनाएँ हमें सच्चा इंसान बनाती हैं। इसलिए हमें हमेशा समाजसेवा में सक्रिय रहना चाहिए।
- निम्नलिखित में से किसी एक अवतरण की सप्रसंग व्याख्या करें :
(i) “अब के हाड़ में यह आम खूब फलेगा । चाचा-भतीजा दोनों यहीं . बैठकर आम खाना । जितना बड़ा तेरा भतीजा है उतना ही यह आम है । जिस महीने उसका जन्म हुआ था उसी महीने मैंने इसे लगाया था ।”
उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति चंद्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा लिखित ‘ उसने कहा था से ली गई है। लहाना सिंह बुरी तरह जख्मी है। उसका अंतिम समय निकट आ चुका प्रतीत हो रहा है। ऐसी अवस्था मे वो अतीत और भविष्य की यादों मे उलझा हुआ है । कभी उसे अतीत की घटनाएँ याद आती है तो कभी भविष्य की कल्पनाएँ उसे झकझोर जाती है। ऐसी ही एक कल्पना करते हुए वह वजीरासिंह (जो कीरत सिंह के रूप में लहना को बताता है) से कहता है कि इस बार आषाढ के महीने मे यह आम खूब फलेगा । तुम और तुम्हारा भतीजा बैठकर खूब आम खाना । यह आम का पेड़ मैंने उसी महीने लगाया था जिस महीने तेरे भतीजे का जन्म हुआ था । यह आम का पेड़ तेरे भतीजे के बराबर है ।
(ii) “इस समय मैं यही सोच रहा था कि वही उद्धत और चंचल मालती आज कितनी सीधी हो गई है, कितनी शांत और एक अखबार के टुकड़े को तरसती है …….।”
उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘दिगंत’ में संकलित सुप्रसिद्ध गद्यकार सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की कहानी ‘रोज’ से उद्धृत हैं। इन पंक्तियों में लेखक ने नायिका मालती के जीवन में आए परिवर्तन का चित्रण किया है। विद्यालय के दिनों में मालती बहुत उद्दंड और चंचल थी। पढ़ाई में उसका बिल्कुल मन नहीं लगता था, जिसके कारण वह अपने माता-पिता से डाँट-फटकार खाती थी। किंतु विवाहोपरान्त परिस्थितियाँ बदल गईं और आज वही मालती पढ़ाई का महत्व समझने लगी है। अब वह पढ़ने के लिए तरसती है, पर उसके पास संसाधन नहीं हैं। कभी जिसके पास पुस्तकों का ढेर हुआ करता था, वही आज अखबार के एक टुकड़े को पाने के लिए लालायित है। इस प्रकार लेखक ने दिखाया है कि परिस्थितियाँ किस प्रकार व्यक्ति को विवश कर देती हैं और उसके स्वभाव को बदल देती हैं।
(iii) “कलि कराल दुकाल दारुन, सब कुभाँति कुसाजु ।
नीच जन, मन ऊँच, जैसी कोढ़ में की खाजु ।।
उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियाँ विनय पत्रिका से ली गई है जिसमे महाकवि तुलसीदास अपनी दीन – हीन अवस्था का वर्णन करते हुए कहते है कि हे प्रभु ! इस कलयुग मे भयंकर अकाल पड़ा है और जो भी मोक्ष को प्राप्त करने का मार्ग है वो पापों से भरा हुआ है । प्रत्येक चीज मे दुर्व्यस्थता ही दिखाई पड़ रही है | हे प्रभु मैं एक नीच जीव हूँ जिसकी अभिलाषाएं ऊंची है जो मुझे उसी प्रकार कष्ट देती है जैसे कोंढ में खाज दुख दिया करती है । अतः हे प्रभु मेरी विनती स्वीकार करें और मुझे अपनी कृपा का मात्र एक निवाला प्रदान करें ।
(iv) “दावा द्रुम-दंड पर चीता मृग-झुंड पर,
भूषण बितुंड पर जैसे मृगराज है ।”
उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियाँ में कवि भूषण शिवाजी के शौर्य का बखान – करते हुए कहते है कि शिवाजी का मलेच्छ पर उसी प्रकार राज हैं जिस प्रकार जंगल की आग का वृक्ष की डालों पर, चीता का मृग झुंड पर और हाथी पर सिंह का राज है | इन पंक्तियों में भूषण ने शिवाजी के शौर्य की तुलना जंगल की आग, चीता और सिंह के साथ की है |
- अपने मुहल्ले में जल-जमाव की समस्या की ओर ध्यानाकृष्ट करते हुए नगर आयुक्त के पास एक आवेदन पत्र लिखें।
उत्तर –
सेवा में,
नगर आयुक्त महोदय,
नगर निगम, __________ (शहर का नाम)।
विषय : मुहल्ले में जल-जमाव की समस्या के समाधान हेतु आवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आदित्य झा आपके नगर के मोहल्ला नाला रोड का निवासी हूँ। हमारे मुहल्ले में लंबे समय से जल-जमाव की समस्या बनी हुई है। बरसात के मौसम में नालियों का पानी सड़कों पर भर जाता है और कई दिनों तक निकल नहीं पाता। इससे चारों ओर गंदगी और बदबू फैल जाती है। मच्छर, मक्खी तथा अन्य कीट-पतंगे पनपने लगते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और हैजा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। आने-जाने वालों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
अतः आपसे निवेदन है कि कृपया हमारे मुहल्ले की नालियों की सफाई नियमित रूप से करवाई जाए और जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके।
आपकी कृपा के लिए हम मुहल्लेवासी सदा आभारी रहेंगे।
भवदीय,
आदित्य झा
अथवा,
अपने घर की आर्थिक समस्या को नानाजी से बताते हुए, अपनी पढ़ाई के लिए आर्थिक सहयोग हेतु उनके पास एक पत्र लिखें ।
आदरणीय नानाजी,
सादर प्रणाम।
आशा है कि आप सकुशल होंगे। यहाँ हम सब कुशल हैं। नानाजी, इस पत्र को लिखने का कारण हमारे घर की आर्थिक स्थिति है। पिताजी की आमदनी से घर का खर्च तो किसी तरह चलता है, लेकिन मेरी पढ़ाई पर अधिक ध्यान देना कठिन हो गया है। मुझे किताबें, कॉपियाँ और कोचिंग की फीस भरने में दिक्कत हो रही है।
नानाजी, आप जानते हैं कि मैं पढ़ाई में हमेशा अच्छा प्रदर्शन करता आया हूँ और आगे भी कड़ी मेहनत करना चाहता हूँ। यदि इस समय मुझे आर्थिक सहयोग मिल जाए, तो मैं अपनी पढ़ाई अच्छे से पूरी कर सकूँगा और आपको गर्व का अवसर दे सकूँगा।
आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया मेरी पढ़ाई के लिए कुछ आर्थिक सहायता प्रदान करें। मैं आपका सदा आभारी रहूँगा।
आपका आज्ञाकारी पोता,
आदित्य झा
- निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दें :
(i) ‘आर्ट ऑफ कनवरसेशन‘ क्या है ?
उत्तर- ‘आर्ट ऑफ कनवरसेशन’ बातचीत करने की एक कला है जो योरप के लोगों में ज्यादा प्रचलित है। ऐसी चतुराई के साथ इसमें प्रसंग छेड़ जाते हैं कि जिन्हें सुन कर कानों को अत्यन्त सुख मिलता है। सुहृद गोष्ठी इसी का नाम है । सुहृदु गोष्ठी की बातचीत की यह तारीफ है कि बात करनेवालों की लियाकत अथवा पंडिताई का अभिमान या कपट कहीं एक बात में भी प्रकट न हो, वरन् क्रम में रसाभास पैदा करनेवाले शब्दों को बरकते हुए चतुर सयाने अपनी बातचीत को सरस रखते हैं । इस प्रकार आर्ट ऑफ कनवरशेसन मनुष्य के द्वारा आपस में बातचीत करने की उत्तम कला है जिसके द्वारा मनुष्य बातचीत को हमेशा आनंदमय बनाये रखता है।
(ii) ‘देखते नहीं यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू ।‘ यह सुनते ही लहना की क्या प्रतिक्रिया हुई ?
उत्तर- “कल, देखते नहीं यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू ।” ये बात सुनते ही लहना को काफी गुस्सा आया । साथ ही साथ वह अपने सुध-बुध खो बैठा । इसलिए घर वापस आते समय एक लड़के को नाली में धकेल दिया , एक खोमचे वाले के खोमचे से बिखेर दिया , एक कुत्ते को पत्थर मारा और एक सब्जी वाले की दूध उड़ेल दिया एक पूजा पाठ करने वाली औरत से टकरा गया जिसने उसे अँधा कहा । ऐसे करते करते वो घर पंहुचा ।
(iii) छात्र जीवन में किस विषय पर लेख के लिए जयप्रकाश नारायण को पुरस्कार प्राप्त हुआ ?
उत्तर – जयप्रकाश नारायण को छात्र जीवन में “माई पिक्चर ऑफ सोशलिज्म” नामक लेख के लिए पुरस्कार प्राप्त हुआ था. यह लेख समाजवाद पर उनके विचारों को प्रस्तुत करता है.
(iv) भगत सिंह ने आत्महत्या को कायरता क्यों कहा है ?
उत्तर – भगत सिंह कहते हैं कि आत्महत्या करना, केवल कुछ दुखों से बचने के लिए अपने जीवन को समाप्त कर देना तो कायरता है । वे सुखदेव को पत्र के माध्यम से बताते है कि विपत्तियाँ तो व्यक्ति को पूर्ण बनाती है। उनसे बचने के लिए आत्महत्या करना बहुत बड़ी कायरता है।
(v) जयशंकर प्रसाद के अनुसार चातकी किसके लिए तरसती है ?
उत्तर – चातकी एक पक्षी है जो स्वाति की बूंद के लिए तरसती है। चातकी केवल स्वाति का जल ग्रहण करती है। वह सालोभर स्वाति के जल की प्रतीक्षा करती रहती है और जब स्वाति की बूंद आकाश से गिरता है तभी वह जल ग्रहण करती है। इस कविता में यह उदाहरण सांकेतिक है। दु:खी व्यक्ति सुख प्राप्ति की आशा में चातकी के समान उम्मीद बाँधे रहते हैं। कवि के अनुसार, एक-न-एक दिन उनके दु:खों का अंत होता है।
(vi) भूषण की किन्हीं दो रचनाओं के नाम लिखें ।
उत्तर- भूषण की प्रमुख रचनाएँ कई हैं। उनमें से दो प्रसिद्ध रचनाओं के नाम हैं :
(i) शिवा बावनी (ii) शिवराज भूषण
(vii) नाभादास की किन्हीं दो रचनाओं के नाम लिखें ।
उत्तर- नाभादास की प्रमुख रचनाएँ कई हैं। उनमें से दो प्रसिद्ध रचनाओं के नाम हैं :
(i) भक्तमाल (ii) अष्टयाम
(viii) काल किसे कहते हैं ?
उत्तर- काल वह समय या युग है, जिसमें किसी लेखक ने लिखा हो और उस समय की परिस्थितियों का साहित्य पर प्रभाव हो।
उदाहरण –
भक्ति काल – 14वीं से 17वीं सदी, भक्ति और भगवान प्रेम।
रीतिकाल – 17वीं से 18वीं सदी, अलंकार और श्रृंगार प्रधान।
आधुनिक काल – 19वीं सदी से वर्तमान, समाज और आधुनिक विषय।
(ix) तुलसी सीता से कैसी सहायता माँगते हैं ?
उत्तर- तुलसी मात्र यही चाहते हैं कि सीता माता थोड़ी उनकी सिफारिश प्रभु श्रीराम से कर दें। पर यह ध्यान रहे कि आप मेरी सिफारिश तभी करें, जब अवसर अनुकूल हो, प्रभु श्रीराम प्रसन्नचित्त हों और प्रायः अकेले हों। वे यह भी पूछेंगे कि यह कौन है तो यह बता देना कि मैं दीन हीन हूँ और उन्हीं का नाम लेकर उदर भरता हूँ।
(x) सूरदास का जन्म कहाँ हुआ था और उनका निवास-स्थान कहाँ था ?
उत्तर- सूरदास का जन्म दिल्ली के निकट ‘सीही’ नामक ग्राम में हुआ था। उनका निवास-स्थान ब्रज क्षेत्र में क्रमशः ‘गऊघाट’, वृंदावन और पारसोली ग्राम रहा।
- निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दें :
(i) सूरदास के द्वितीय पद का भावार्थ लिखें ?
उत्तर – बालकृष्ण नंद के घर माँ यशोदा की गोद में बैठे हैं और अपने हाथों से ही भोजन कर रहे हैं। वे थोड़ा-थोड़ा खाते हैं और बाकी भोजन जमीन पर गिरा देते हैं। उनके सामने तरह-तरह के व्यंजन रखे हैं जैसे बरी, बरा, बेसन के पकवान। बालकृष्ण सबसे पहले दही के दोने में रुचि लेते हैं। वे मिश्री, दही और माखन मिलाकर अपने मुख में डालते हैं और कभी-कभी नंद बाबा के मुख में भी डालते हैं। उनके इस व्यवहार को देखकर माँ यशोदा अत्यंत प्रसन्न होती हैं। उनका सौन्दर्य और बाल लीलाएँ तीनों लोकों में दुर्लभ हैं।
सूरदास जी इस पद में बालकृष्ण की नटखट, लीलावती और मासूम भावनाओं का चित्रण कर रहे हैं। वे बालकृष्ण के भोजन करने के ढंग, उनके सौन्दर्य और माता-पिता की प्रसन्नता को इतने मनोहारी रूप में दर्शाते हैं कि देखना मात्र ही आनंददायक है। सूरदास जी की लालसा जूठन पाने की भी है, जो उनकी भक्ति और प्रेम को दर्शाता है।
(ii) जायसी के प्रथम कड़बक का भावार्थ लिखें ।
उत्तर- मलिक मुहम्मद जायसी अपने महाकाव्य पद्मावत में कहते हैं कि उनका एक आँख होना भी उन्हें गुणी और प्रभावशाली बनाता है। उनके काव्य में इतनी शक्ति और सुंदरता है कि जो भी इसे सुनता है, वह मोहित हो जाता है। जैसे ईश्वर ने उन्हें चंद्रमा की तरह इस धरती पर उतारा, वैसे ही उनके काव्य का प्रकाश पूरे संसार में फैलता है। चंद्रमा में थोड़ी कमी होने पर भी उसका उजाला अद्भुत होता है, उसी तरह जायसी की एक आँख से भी उनकी बुद्धि और दृष्टि संसार को समझने के लिए पर्याप्त है।
जायसी उदाहरण देकर बताते हैं कि जैसे आम में नुकीली डाभ के बिना सुगंध नहीं आती, समुद्र का पानी खारा होने के कारण असीम और अद्भुत है, सोने को घरिया में गलाकर ही मूल्यवान बनाया जाता है, वैसे ही उनकी काव्य-कला और गुण पूर्णता तक पहुँचे हैं। उनका यह अनुभव और दृष्टिकोण उन्हें अद्वितीय बनाता है।
अंत में वे कहते हैं कि उनका एक नैन भी दर्पण की तरह निर्मल और स्पष्ट भाव लिए है। इसी कारण बड़े-बड़े लोग उनके काव्य और व्यक्तित्व की ओर आकृष्ट होते हैं और उनके मुख को देखकर आनंद और प्रेरणा प्राप्त करते हैं।
(iii) तुलसीदास का जीवन परिचय लिखें ।
उत्तर – तुलसीदास का जन्म 1543 में राजापुर, बाँदा (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनका मूल नाम रामबोला था। माता-पिता हुलसी और आत्माराम दुबे थे। उनका विवाह रत्नावली से हुआ, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने वैराग्य के कारण घर छोड़ दिया। जन्म के बाद उन्हें परिवार ने छोड़ दिया था, जिसे उनकी दासी चुनियाँ ने पाला-पोषा।
तुलसीदास के गुरु थे नरहरि दास (दीक्षा गुरु) और शेष सनातन (शिक्षा गुरु)। उन्होंने काशी में पंद्रह वर्षों तक वेद, दर्शन, पुराण, इतिहास और काव्य आदि की शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा पूरी करने के बाद वे कथावाचक बने और अपने ज्ञान से लोगों को प्रभावित किया।
तुलसीदास ने कई तीर्थों की यात्रा की, जैसे सूकरखेत, चित्रकूट, प्रयाग, मथुरा-वृंदावन, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, बद्रीनाथ, जगन्नाथपुरी और रामेश्वर। उनके मित्र और स्नेही थे अब्दुर्रहीम खानखाना, महागजा मानसिंह, नाभादास, मधुसूदन सरस्वती आदि।
(iv) भगत सिंह रूसी साहित्य को इतना महत्त्वपूर्ण क्यों मानते हैं ? वे एक क्रांतिकारी से क्या अपेक्षाएँ रखते हैं ?
उत्तर- भगत सिंह रूसी साहित्य को इसलिए महत्त्वपूर्ण मानते थे क्योंकि इसमें वास्तविक कष्ट, दुख और विपत्तियों का चित्रण मिलता है। रूसी लेखकों ने अपने साहित्य में कठिनाइयों और दुखों को सहने की भावना दिखाई है। भगत सिंह मानते थे कि केवल कहानियों में इन कठिनाइयों का वर्णन करने से ही लोग प्रेरित नहीं होते, बल्कि असली क्रांतिकारी वही हैं जो इन विपत्तियों और कठिनाइयों का अपने जीवन में अनुभव करें।
भगत सिंह के अनुसार, एक क्रांतिकारी को केवल साहसी होना ही पर्याप्त नहीं है। उसे सभी कठिनाइयों, दुखों और संघर्षों को सहने की क्षमता होनी चाहिए। वह न केवल अपने विचारों के प्रति ईमानदार होना चाहिए, बल्कि अपने कर्मों में भी निडर और सत्यनिष्ठ रहना चाहिए। क्रांतिकारी का जीवन स्वयं में अनुशासन, धैर्य और सामाजिक दायित्वों की पूरी समझ का प्रतीक होना चाहिए।
(v) ‘रोज‘ शीर्षक पाठ के अनुसार मालती का चरित्र-चित्रण अपने शब्दों में करें ।
उत्तर- मालती, ‘रोज’ कहानी की मुख्य पात्र है, जिसका जीवन एक नीरस दिनचर्या से घिरा हुआ है. उसका चरित्र निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- नीरवता और अकेलापन: मालती का जीवन एक ही ढर्रे पर चलता है, जिसमें कोई उत्साह या उमंग नहीं दिखती. लेखक को उसके घर का वातावरण शांत और अकेलापन भरा लगता है.
- गृहिणी: वह एक कुशल गृहिणी है जो घर और बच्चे (टिटी) की देखभाल अकेले करती है.
- भावनात्मक शून्यता: कहानी में मालती के अंदर एक प्रकार की भावनात्मक शून्यता दिखाई देती है, जो उसके वैवाहिक जीवन की एकरसता और निराशा का परिणाम है.
- दबी हुई इच्छाएँ: यद्यपि वह अपनी दिनचर्या में व्यस्त रहती है, उसके भीतर कहीं न कहीं एक बेहतर जीवन की दबी हुई इच्छाएँ और आकांक्षाएँ मौजूद हैं, जो कभी-कभी उसके व्यवहार से झलकती हैं.
संक्षेप में, मालती एक ऐसी स्त्री है जो अपनी जिम्मेदारियों को निभाती है, लेकिन उसका जीवन उत्साहहीन और भावनात्मक रूप से खाली है, जो उसकी परिस्थितियों का परिणाम है।
(vi) ‘सम्पूर्ण क्रांति‘ शीर्षक पाठ का सारांश लिखें ।
उत्तर- प्रस्तुत पाठ में लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा दिये गए ऐतिहासिक भाषण का एक अंग है, जिसे उन्होंने 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में दिया था। भाषण को सुनने के लिए लाखों की संख्या में लोग पूरे प्रदेश से आए थे जिसमें युवाओं का बोलबाला था। नारायण जी कहते हैं कि अगर दिनकर जी और रामवृक्ष बेनीपुरी जी होते तो उनकी कविता भारत के नव निर्माण के लिए क्रांति का कार्य करती लेकिन वह आज वो हमारे बीच नहीं है। जयप्रकाश नारायण जी कहते हैं कि यह नेता बनने की जिम्मेवारी मैंने माँग के नहीं लिया मुझे यह जिम्मेदारी युवा पीढ़ी द्वारा सौंपी गई है। वह कहते हैं कि मैं नाम का नेता नहीं बनूंगा मैं सब की बात सुनूंगा लेकिन अंतिम फैसला मेरा होगा। लेखक ने अपने परिवार की गरीबी के बावजूद अमेरिका में अपने बलबूते पर पढ़ाई की तथा वापस आकर कांग्रेस में शामिल हुए।
जयप्रकाश बाबू से मिलने बहुत सारे नेता आए और सब ने उन्हें एकतरफ लोकतंत्र के शिक्षा दी तो दूसरी तरफ लोगों के जुलूस को रोका गया। लेखक कहते हैं कि ऐसे लोगों को शर्म नहीं आती जो एक तरफ लोकतंत्र की बातें करते हैं तो दूसरी तरफ लोकतंत्र को अपने पैरों से कुचलते हैं। लेखक के कुछ मित्र उनका और इंदिरा जी का मेल मिलाप करवाना चाहते थे। लेखक कहते हैं कि मेरा इंदिरा जी से व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है बल्कि उनकी गलत नीतियां से मेरा झगड़ा है। लेखक ने कई बार बापू और नेहरु जी की भी आलोचना की। लेखक कहते हैं कि आज राजनीति में भ्रष्टाचार बढ़ा है जिसका प्रमुख कारण चुनावों की खर्चा है।
आज के लोकतंत्र में जनता को इतना ही अधिकार है कि वह चुनाव करें। लोकतंत्र मे चुनाव के बाद अपनी ही प्रतिनिधियों पर जनता का कोई अंकुश नहीं होता है। लेखक के अनुसार अन्य देशों में प्रेस तथा पत्रिका प्रतिनिधियों पर अंकुश लगाती है, लेकिन हमारे देश में इसका बहुत अभाव है। अतः हम कह सकते हैं कि जयप्रकाश नारायण जी का यह भाषण बाकई एक शानदार भाषण है।
- निम्नलिखित अवतरण का संक्षेपण कीजिए :
(i) संसार के सभी देशों में शिक्षित व्यक्ति की सबसे पहली पहचान यह होती है कि वह अपनी मातृभाषा में दक्षता से काम कर सकता है । केवल भारत ही एक ऐसा देश है जिसमें शिक्षित व्यक्ति वह समझा जाता है, जो अंग्रेजी भाषा में दक्ष हो । विदेशों में सुसंस्कृत व्यक्ति वह समझा जाता है जिसके घर में अपनी भाषा की पुस्तकों का संग्रह हो और जिसे बराबर यह पता रहे कि उसकी भाषा के अच्छे लेखक और कवि कौन हैं । वर्तमान में हम भारतीयों का भी यह पुनीत कर्त्तव्य है कि हम अपनी मातृभाषा का सम्मान करते हुए अपनी समृद्ध साहित्यिक विरासत का अध्ययन और मनन करें ।
उत्तर- शीर्षक: अपनी भाषा का सम्मान
संसार के देशों में शिक्षित व्यक्ति की पहचान अपनी मातृभाषा में दक्षता से होती है। भारत में केवल अंग्रेज़ी में पारंगत व्यक्ति को शिक्षित माना जाता है। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी मातृभाषा का सम्मान करें और उसके साहित्य का अध्ययन करें।
(मूल उद्धाहरण में शब्द संख्या – 106 संक्षेपण में शब्द संख्या – 44)
(ii) मनुष्य के जीवन में संतोष का महत्त्वपूर्ण स्थान है । संतोषी मनुष्य सुखी रहता है । असंतोष हर बीमारी की जड़ है। मनुष्य को रुपये-पैसे से कभी संतोष नहीं मिलता । संतोष रूपी दौलत मिलने पर समस्त वैभव धूल के समान प्रतीत होता है । हमें कभी सांसारिक चीजें संतोष नहीं दे सकतीं । संतोष का संबंध मन से है। संतोष सबसे बड़ी दौलत है।
उत्तर- शीर्षक: संतोष का महत्त्व
मनुष्य के जीवन में संतोष बहुत महत्वपूर्ण है। संतोषी व्यक्ति हमेशा सुखी रहता है और असंतोष दुख और बीमारी की जड़ है। रुपये-पैसे या सांसारिक चीजें असली संतोष नहीं दे सकतीं। वास्तविक दौलत संतोष है, जो मन से मिलती है और जीवन को सच्चा सुख देती है।
(मूल उद्धाहरण में शब्द संख्या – 60 संक्षेपण में शब्द संख्या – 44)
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